साहित्य संस्थान

अध्यात्म, शिक्षा , संस्कृति एवं पर्यावरण के लिए गतिमान

साहित्य-संस्थान एक पंजीकृत गैर सरकारी संस्था है | प्रज्ञा-शिखर, टॉडगढ़ इसका मुख्यालय है | बिना लाभ हानि जन हितकारी कार्यों का संपादन इसका उद्देश्य है | पंजीयक संस्थाए अजमेर१९८७-८८ के अंतर्गत इसका पंजीयन हुआ |इसके संचालन में लगभग ७९१ सदय सहभागी हैं | ११७ लोग इसका कार्य सम्भालते हैं |

 

साहित्य संस्थान की प्रवृत्तियां

लोक कल्याण के लिए इस समय साहित्य संस्थान द्वारा निम्न कार्य किए जा रहे हैं -

 

भगवान् महावीर ग्रंथागार

पुस्तकालय - संस्था द्वारा एक पुस्तकालय स्थापित किया गया है । जिसका नाम ‘‘भगवान महावीर ग्रंथागार’’ है । इस पुस्तकालय में अध्यात्म, धर्म, दर्शन, आदि के साथ विभिन्न विचारधाराओं की 13869 चुनिंदा पुस्तकें इस समय संग्रहित हैं । भारतवर्ष के प्रमुख विचारकों जैसे महात्मा गांधी, महर्षि अरविन्द , श्रीराम शर्मा आचार्य, आचार्य रजनीश, गुरु गोलवलकर, आचार्य तुलसी, आचार्य महाप्रज्ञ, महाश्रमणी कनक प्रभा आदि के विचार-ग्रन्थ इस संग्रह में समाहित है |सभी पुस्तकें व्यवस्थापित रुप से स्टील अलमारियों में सुरक्षित रखी गई हैं।

 

पुरा संकलन संकाय

टॉडगढ़ क्षेत्र के संस्कृतिक तत्वों के सरंक्षित करना इसका मुख्य उद्देश्य है |पुराने पत्र, चित्र, बहियाँ, डायरियाँ, प्रतिमायें और अवशेष इससे कक्ष में संग्रहित हैं | शोधार्थियों के लिए यहाँ बहुत सामग्री उपलब्ध हैं |

 

मगरा मेरवाड़ा संस्कृतिक शोध सम्मेलन

"मगरा मेरवाड़ा सांस्कृतिक शोध सम्मेलन" के अन्तर्गत मेरवाड़ा क्षेत्र की संस्कृति से सर्व साधारण को अवगत करवाने हेतु पूरे क्षेत्र का प्रामाणिक इतिहास तैयार करवा कर प्रकाशित करने की योजना है |विद्यावान लेखकों औरइतिहास विदों को इसमें संयुक्त किया जा रहा है |मेरवाड़ा के इतिहास से सम्बंधित अनेक चित्र एवं पूरी सामग्री दर्शकों की जानकारी हेतु परिसर में प्रदर्शित भी की गई हैं |

 

अहिंसा प्रशिक्षण केन्द्र

सिलाई प्रशिक्षण

ग्रामीण महिलाओं को रोजगार प्रशिक्षण देने की भावना से संस्था द्वारा एक सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किया गया है । जिसमें 16 सिलाई मशीनें उपलब्ध हैं ।

कम्प्यूटर प्रशिक्षण

युवाओं को कम्प्यूटर की ट्रेनिंग देने हेतु संस्था द्वारा एक कम्प्यूटर केन्द्र की स्थापना की गई है जिसमें छ: : कम्प्यूटर हैं । विद्यालय के छात्रों को इसमें कम्प्यूटर ट्रेनिंग दी जाती है

 

साहित्य विक्रय विभाग

साहित्य विक्रय विभाग - सत्साहित्य के प्रचार प्रसार के उद्देश्य से ही साहित्य संस्थान की स्थापना की गई थी । आज जब संस्था विविध विधामयी बनगई है तब भी साहित्य विक्रय केन्द्र ज्यों का त्यों है | साधु साध्वियों का साहित्य, विक्रय के लिए आज भी इस केन्द्र में उपलब्ध है ।

 

साहित्य संस्थान द्वारा चलये जा रहे कार्यक्रम

वृक्षारोपण

वृक्षारोपण - पर्यावरण शुद्धि के लिए संस्था ने सन 1985 से निरंतर वृक्षारोपण का क्रम चलाया है । फलस्वरुप लगभग पांच हजार पेड संस्था परिसर में विकसित हुए हैं । प्रतिवर्ष वृक्षारोपण का कार्य किया जाता है । नन्हे पौधों की सुरक्षा के लिए संस्था के पास 200 ट्री गार्ड हैं ।

 

रुग्णवाहिका

संस्थान के पास एक एम्बुलेंस की व्यवस्था है जो जरूरतमंद रोगियों को निकट के स्वास्थय केंद्र पंहुचने में मदद करती है |

 

साहित्य संस्थान की भावी योजनाये

निवृताश्रम

परिसर में एक निवृताश्रम बनाना चाहते हैं | निवृताश्रम वृद्धाश्रम की भांति कार्यक्षम गृह निवृत लोगों का एक आवास केंद्र होगा | जो ज्येष्ठ नागरिकों को स्वाभिमानी जीवन यापन करते हुए समाधि मरण तक ले जायेगा |

 

संस्थापक

श्री भीकमचंद जी कोठारी “भ्रमर”

श्री हिम्मतमल जी कोठारी

स्व. श्री लालचंद जी कोठारी

 

संचालन

साहित्य संस्थान की गतिविधियों का संचालन सदस्यों द्वारा निर्वाचित कार्यकारिणी द्वारा किया जाता है | वर्तमान में श्री मीठालाल लोढ़ा संस्थान का अध्यक्षीय दायित्व निभा रहे हैं |

सत्र २०१४-२०१७ कार्यकारिणी

 

श्री. मिठ्ठालाल जी गन्ना ( अध्यक्ष )

श्री. नरेन्द्रकुमार जी तातेड ( महामंत्री )

श्री. गेहरीलाल जी कोठारी ( कोषाध्यक्ष )